पद्म श्री मैती आंदोलन के जनक कल्याण सिंह रावत की पहल रंग लाई अब हर साल वन विभाग मनाएगा बुग्याल दिवस: सुबोध उनियाल

पद्म श्री मैती आंदोलन के जनक कल्याण सिंह रावत की पहल रंग लाई अब हर साल वन विभाग मनाएगा बुग्याल दिवस: सुबोध उनियाल


बुग्याल बचाने को विज्ञान, परंपरा और जनभागीदारी का संगम जरूरी

देहरादून, : उत्तराखण्ड के बुग्यालों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक शोध के साथ पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। यह बात बुधवार को संस्कृति विभाग ऑडिटोरियम में आयोजित बुग्याल संरक्षण दिवस के दौरान विशेषज्ञों ने कही। मैती संस्था, यूकॉस्ट और हेस्को के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सेमिनार में बुग्यालों के संरक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और प्रभावी संरक्षण कार्यवाही पर मंथन हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मैती संस्था के संस्थापक एवं सचिव पद्म श्री डॉ. कल्याण सिंह रावत के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने बुग्यालों को उत्तराखण्ड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका को अहम बताया।
सेमिनार में पूर्व निदेशक भारतीय वन्यजीव संस्थान डॉ. जीएस रावत ने बुग्यालों के पारिस्थितिक महत्व और संरक्षण की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। यूएसएसी के वैज्ञानिक डॉ. गजेन्द्र सिंह ने अंतरिक्ष एवं आधुनिक तकनीक के जरिए बुग्यालों के अध्ययन और संरक्षण की संभावनाएं बताईं। मानसखंड विज्ञान केंद्र अल्मोड़ा के एमेरिटस वैज्ञानिक डॉ. जीसीएस नेगी ने हिमालयी पर्यावरण और पारंपरिक ज्ञान के महत्व पर विचार रखे। यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डीपी उनियाल ने भी विज्ञान एवं तकनीकी दृष्टिकोण को जरूरी बताया।
मुख्य अतिथि वन, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखण्ड वन विभाग की ओर से हर वर्ष बुग्याल दिवस मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों और आमजन को बुग्याल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने सरकार, स्थानीय समुदायों और सामाजिक एवं पर्यावरणीय संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।
अति विशिष्ट अतिथि पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को समय की बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने जनभागीदारी और स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने विज्ञान एवं तकनीकी नवाचार के जरिए बुग्याल संरक्षण की आवश्यकता बताई। मुख्य वन संरक्षक-पर्यावरण सुशांत कुमार पटनायक ने बुग्यालों के पर्यावरणीय महत्व और प्रभावी संरक्षण कार्यवाही पर विचार रखे।
उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान
कार्यक्रम में पर्यावरण, विज्ञान, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘गिरि गंगा गौरव सम्मान’ प्रदान किए गए। डॉ. जीसीएस नेगी को पर्यावरण एवं शोध, प्रो. दुर्गेश पंत को विज्ञान, तकनीकी नवाचार एवं शिक्षा तथा अधिवक्ता ललित जोशी को शिक्षा, सामाजिक कार्य एवं नशा मुक्ति जनजागरूकता के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘मैती सम्मान’ से पवन शर्मा, चन्दन नेगी, शम्भू प्रसाद नौटियाल, प्रताप पोखरियाल, जगदम्बा प्रसाद मैठाणी, मनोज ध्यानी और संदीप गुसाईं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ. भवतोष शर्मा ने किया। इस अवसर पर पद्म श्री बसंती बिष्ट, डॉ. राजेंद्र राणा, संतोष रावत, चंद्रावती असवाल, संगीता रावत, रमेश रावत और मंजीत नेगी सहित पर्यावरणविद्, वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रकृति प्रेमी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने कहा कि बुग्याल महज उच्च हिमालयी घास के मैदान नहीं हैं, बल्कि राज्य की जैव विविधता, जल स्रोतों, स्थानीय आजीविका और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय सहभागिता और सरकारी प्रयासों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है।

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