समाजसेवी रोशन रतूड़ी और दीपिका नौटियाल की मुहिम रंग लाई, इंद्रमणि की घर वापसी को जुटे 1.40 करोड़
जहां उम्मीद की लौ बुझने लगे, वहां रोशन रतूड़ी बनकर कोई रोशनी करता है… डी एस कैंतुरा, रैबार पहाड़ का किसी की मदद करना सिर्फ हाथ बढ़ाना नहीं, बल्कि टूटती उम्मीद को थाम लेना है। किसी के चेहरे पर मुस्कान लौटाना ही असली समाजसेवा है। इसी सोच को अपने कर्मों में उतार रहे हैं…
