


उत्तराखंड में अचानक सत्ता के खिलाफ बड़ा जनाक्रोश, सड़कों पर बढ़ा विरोध; शिक्षकों से लेकर कांग्रेस और युवा संगठनों तक सरकार पर हमलावर
देहरादून। उत्तराखंड में इन दिनों सत्ता के खिलाफ जनाक्रोश लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षकों, कर्मचारियों, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कहीं शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं, तो कहीं कांग्रेस सरकार को भूमि घोटालों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घेर रही है। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को भी विरोध का सामना करना पड़ा है।
सबसे ताजा मामला अल्मोड़ा जिले के दन्या क्षेत्र का है, जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दौरे के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री के काफिले के सामने पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने “गो बैक” के नारे लगाए और सरकार विरोधी नारेबाजी की। अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से पुलिस और खुफिया तंत्र में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
युवा कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा पेपर लीक, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार जवाब देने में विफल रही है। इन्हीं मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया।
दूसरी ओर कांग्रेस ने भी भूमि घोटालों और प्रदेश के अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर सचिवालय कूच किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “भू-माफिया हटाओ, उत्तराखंड की जमीनें बचाओ” के नारे के साथ सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि प्रदेश में जनहित की अनदेखी की जा रही है।
वहीं पोखरी में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट का घेराव किया। कार्यकर्ताओं ने कर्णप्रयाग की घटनाओं और क्षेत्र की बदहाल सड़कों को लेकर सवाल उठाए। इस दौरान स्थानीय समस्याओं को लेकर जनता की नाराजगी खुलकर सामने आई।
इसके अलावा विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा भी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ रहा है।
हालांकि इन तमाम विरोध प्रदर्शनों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सरकार की सख्त कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं। हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मंजूरी दी है।
सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की संस्तुति की है, जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट और तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं। विजिलेंस जांच में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और पद के दुरुपयोग के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ “सर्जिकल स्ट्राइक” बताते हुए कहा है कि उनकी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का दावा है कि जनधन की लूट और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
एक ओर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर अपनी सख्त छवि प्रस्तुत कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में बढ़ते विरोध-प्रदर्शन, शिक्षकों का आंदोलन, कांग्रेस का सचिवालय कूच, युवा कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाना और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का घेराव यह संकेत दे रहे हैं कि उत्तराखंड में कई मुद्दों को लेकर जनता के बीच असंतोष और जनाक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार अपनी कार्रवाई और विकास कार्यों के जरिए जनता का भरोसा मजबूत कर पाएगी या फिर यह जनाक्रोश आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा।
