


मोबाइल बना रिश्तों का ‘सौतन’! स्क्रीन की बढ़ती लत से दांपत्य जीवन पर संकट, सेक्सुअल लाइफ भी प्रभावित
पति-पत्नी के बीच बढ़ती डिजिटल दूरी बनी चिंता का कारण, शोध में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
विशेष रिपोर्ट | रैबार पहाड़ का
मोबाइल फोन आज जिंदगी की जरूरत बन चुका है, लेकिन यही जरूरत जब आदत और फिर लत में बदल जाती है तो इसका असर परिवार और दांपत्य जीवन पर भी पड़ने लगता है। पति-पत्नी एक ही कमरे में मौजूद होते हैं, मगर दोनों की नजरें मोबाइल स्क्रीन पर टिकी रहती हैं। बातचीत कम होती है, भावनात्मक जुड़ाव कमजोर पड़ता है और कई मामलों में इसका असर यौन संबंधों तथा वैवाहिक संतुष्टि पर भी देखने को मिलता है।
विशेषज्ञ इस स्थिति को ‘पार्टनर फबिंग’ (Partner Phubbing) कहते हैं। इसका अर्थ है—अपने साथी के साथ समय बिताते हुए बार-बार मोबाइल में व्यस्त रहना और उसे नजरअंदाज करना।
मोबाइल पर ध्यान, साथी से दूरी
अमेरिका में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल रिश्तों में सामान्य व्यवहार बन चुका है। अध्ययन में शामिल लोगों के बीच साथी के साथ समय बिताते हुए मोबाइल का इस्तेमाल व्यापक रूप से देखा गया। शोधकर्ताओं ने इस बात पर ध्यान दिया कि मोबाइल के कारण बातचीत और आपसी जुड़ाव किस तरह प्रभावित होते हैं। PubMed Central (PMC)
रिश्तों पर हुए अन्य अध्ययनों में भी मोबाइल के कारण साथी को नजरअंदाज किए जाने और वैवाहिक संतुष्टि के बीच संबंध सामने आया है। हालांकि, मोबाइल के इस्तेमाल को सीधे तलाक का कारण साबित करने वाला कोई सार्वभौमिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
क्या मोबाइल सेक्सुअल लाइफ को प्रभावित कर रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार, दांपत्य जीवन में शारीरिक संबंध केवल शारीरिक जरूरत नहीं, बल्कि भावनात्मक निकटता, भरोसे और संवाद से भी जुड़े होते हैं। जब पति-पत्नी के बीच बातचीत घटती है और मोबाइल का इस्तेमाल प्राथमिकता बन जाता है, तो इसके
संभावित प्रभाव दिखाई दे सकते हैं—
एक-दूसरे के लिए समय कम होना।
भावनात्मक दूरी और उपेक्षा का एहसास।
निजी बातचीत तथा रोमांटिक पलों में कमी।
तनाव और आपसी नाराजगी बढ़ना।
यौन इच्छा और अंतरंगता में कमी महसूस होना।
हालांकि, इन प्रभावों की तीव्रता हर दंपती में अलग हो सकती है। मोबाइल इस्तेमाल और यौन जीवन में गिरावट के बीच संबंध का अर्थ यह नहीं है कि हर मामले में मोबाइल ही कारण है।
26 प्रतिशत दंपतियों को तलाक का डर? आंकड़े को समझना जरूरी
अमेरिका के Institute for Family Studies की एक रिपोर्ट में मोबाइल इस्तेमाल को लेकर रिश्तों में असंतोष और तलाक की आशंका पर चर्चा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 26 प्रतिशत ऐसे दंपतियों ने, जिन्हें अपने मोबाइल इस्तेमाल पर नियंत्रण की समस्या महसूस होती है, कहा कि उनका विवाह निकट या दूर भविष्य में तलाक तक पहुंच सकता है।
यह आंकड़ा सभी विवाहित लोगों पर लागू नहीं होता। यह उन दंपतियों से जुड़ा है जिन्होंने मोबाइल नियंत्रण की समस्या बताई थी। इसलिए इसे यह कहने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता कि हर चार में से एक विवाह मोबाइल के कारण टूट रहा है।
भारत में भी बढ़ रही डिजिटल चुनौती
भारत में स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल ने जीवनशैली को तेजी से बदला है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनोरंजन, गेमिंग और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन लोगों का ध्यान लंबे समय तक बांधे रखते हैं। इसका असर परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय पर पड़ सकता है।
हालांकि, भारत में ऐसा कोई विश्वसनीय राष्ट्रीय सर्वेक्षण उपलब्ध नहीं है, जो यह प्रमाणित करता हो कि कितने प्रतिशत तलाक केवल मोबाइल फोन या मोबाइल की वजह से प्रभावित सेक्सुअल लाइफ के कारण होते हैं।
इसलिए भारत के संदर्भ में मोबाइल को तलाक का मुख्य कारण
रिश्तों में मोबाइल से ज्यादा जरूरी है संवाद
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, मोबाइल को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन पति-पत्नी को उसके इस्तेमाल की सीमाएं तय करनी चाहिए। साथ खाना खाते समय मोबाइल दूर रखना, सोने से पहले कुछ समय बातचीत करना और एक-दूसरे की भावनाओं को समझना रिश्ते को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।
यदि मोबाइल इस्तेमाल के साथ लगातार तनाव, यौन जीवन में परेशानी या वैवाहिक असंतोष बना हुआ है, तो दंपती को आपसी संवाद के साथ किसी योग्य मनोवैज्ञानिक, सेक्सोलॉजिस्ट या मैरिज काउंसलर की मदद लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
मोबाइल रिश्तों का दुश्मन नहीं है, लेकिन उसका अत्यधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल पति-पत्नी के बीच भावनात्मक दूरी जरूर बढ़ा सकता है। तलाक का कारण केवल मोबाइल नहीं, बल्कि संवाद की कमी, विश्वास का संकट, आर्थिक तनाव और कई अन्य परिस्थितियां भी हो सकती हैं। इसलिए मोबाइल को दोष देने के बजाय दांपत्य जीवन में समय, संवाद और आपसी सम्मान को प्राथमिकता देना जरूरी है।
